याद-ए-नबी का गुलशन महका महका लगता है || Yaad-e-Nabi Ka Gulshan Mehka Mehka Lagta Hai
Yaad-e-Nabi Ka Gulshan Mehka Mehka Lagta Hai Lyrics In Hindi
हर नफ़स ‘इश्क़-ए-मुहम्मद का पयामी कर लो
ज़िंदगी मिट के मोहब्बत में दवामी कर लो
बादशाही है अगर दोनों जहाँ की दरकार
दोस्तों ! आओ, मुहम्मद की ग़ुलामी कर लो
नबी की याद है सरमाया ग़म के मारों का
यही तो एक वसीला हैं बे-सहारों का
याद-ए-नबी का गुलशन महका महका लगता हैं
महफ़िल में मौजूद है आक़ा ऐसा लगता हैं
नाम-ए-मुहम्मद कितना मीठा मीठा लगता हैं
प्यारे नबी का ज़िक्र भी हम को प्यारा लगता हैं
लब पर नग़्में सल्ले-’अला के, हाथों में कश्कोल
देखो तो सरकार का मँगता कैसा लगता हैं
आँखों में मा-ज़ाग़ का कजला, सर ताहा का ताज
कैसे कहूँ कमली वाला हम जैसा लगता हैं
ख़ाक हैं हम और ख़ाक ज़माना और वो नूर ही नूर
कैसे कहूँ कि कमली वाला हम सा लगता हैं
ग़ौस, क़ुतब, अब्दाल, क़लंदर सब उन के मोहताज
मेरा दाता हर दाता का दाता लगता हैं
आओ सुनाएँ अपने नबी को अपने ग़म की बात
उन के ‘इलावा कौन, नियाज़ी ! अपना लगता हैं
मौलाना अब्दुल सत्तार नियाज़ी
अशफ़ाक़ अत्तारी
जुनैद बरकाती चित्तौड़गढ़
राव हस्सन अली असद