रोक लेती है आप की निस्बत, तीर जितने भी हम पे चलते हैं || Rok Leti Hai Aap Ki Nisbat, Teer Jitne Bhi Ham Pe Chalte Hain
Rok Leti Hai Aap Ki Nisbat, Teer Jitne Bhi Ham Pe Chalte Hain Lyrics In Hindi
रोक लेती है आप की निस्बत
तीर जितने भी हम पे चलते हैं
ये करम है हुज़ूर का हम पर
आने वाले अज़ाब टलते हैं
वो ही भरते हैं झोलियाँ सब की
वो समझते है बोलियाँ सब की
आओ, बाज़ार-ए-मुस्तफ़ा को चले
खोटे सिक्के वहीं पे चलते हैं
अपनी औक़ात सिर्फ़ इतनी हैं
कुछ नहीं, बात सिर्फ़ इतनी हैं
कल भी टुकड़ों पे उन के पलते थे
अब भी टुकड़ों पे उन के पलते हैं
अब हमें क्या कोई गिराएगा
हर सहारा गले लगाएगा
हम ने ख़ुद को गिरा दिया है वहाँ
गिरने वाले जहाँ संभलते हैं
घर वो ही मुश्कबार होते हैं
ख़ुल्द से हमकिनार होते हैं
ज़िक्र-ए-सरकार के हवालों से
जिन घरों में चराग़ जलते हैं
दिल की हसरत वो पूरी फ़रमाएँ
इस तरह तयबा मुझ को बुलवाएँ
मेरे मुर्शिद ये मुझ से फ़रमाएँ
आओ, तयबा नगर को चलते हैं
ज़िक्र-ए-सरकार के उजालों की
बे-निहायत हैं रिफ़’अतें, ख़ालिद !
ये उजाले कभी न सिमटेंगे
ये वो सूरज नहीं जो ढलते हैं
ख़ालिद महमूद ख़ालिद
ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरी
सैय्यद हस्सन उल्लाह हुसैनी
ओवैस रज़ा क़ादरी