क़ब्र जिस दम मेरी तैयार कराई जाए || Qabar Jis Dam Meri Tayyar Karai Jaye
Qabar Jis Dam Meri Tayyar Karai Jaye Lyrics In Hindi
क़ब्र जिस दम मेरी तैयार कराई जाए
ख़ाक थोड़ी सी मदीने की भी डाली जाए
आब-ए-ज़मज़म हो मयस्सर तो ग़ुस्ल दे देना
चादर-ए-क़फ़न भी तयबा से मंगाई जाए
इतनी गहरी हो लहद के मैं खड़ा हो जाऊँ
दीद जिस दम मुझे आक़ा की कराई जाए
चश्म-ए-बद क़ाबिल-ए-दीदार बनाने के लिए
ख़ाक-ए-पा थोड़ी सी आँखों में लगाई जाए
जब जनाज़े को मेरे लेकर चलें मेरे रक़ीब
ना’त-ए-सरकार मुझे वहाँ भी सुनाई जाए
हमको काँटा भी चुभे दर्द उन्हें होता हैं
ऐ मलक ! रूह मेरी धीरे से निकाली जाए
क्या ही अच्छा हो के सलमान का भरम रह जाए
चादर-ए-क़फ़न न चेहरे से हटाई जाए
नक़्श-ए-नालैन-ए-नबी सर पे मेरे रख देना
यही सूरत है के सूरत ये दिखाई जाए
निसार अहमद मर्फ़ानी
अल्लामा हाफ़िज़ बिलाल क़ादरी
मोहम्मद फ़िरोज़ हश्मती पाली