लहद में आक़ा की दीद होगी | मैं सज के घर से निकल रहा || Lahad Mein Aaqa Ki Deed Hogi | Main Saj Ke Ghar Se Nikal Raha Hoon
Lahad Mein Aaqa Ki Deed Hogi | Main Saj Ke Ghar Se Nikal Raha Hoon Lyrics In Hindi
लहद में आक़ा की दीद होगी
मैं सज के घर से निकल रहा हूँ
मेरे ‘अज़ीज़ों ! ये रोना कैसा ?
मकान ही तो बदल रहा हूँ
लगा के ख़ुशबू मैं सो रहा हूँ
मुझे फ़रिश्तों ! उठाओ जल्दी
नबी हमारे है सामने अब
ख़ुशी के मारे मचल रहा हूँ
हों बा’द में या सवाल पहले
नकीरों ! आक़ा का ज़िक्र छेड़ो
मिलन की शब है, कफ़न में अपने
ख़ुशी के मारे मचल रहा हूँ
गुनाह की गठरी है भारी सर पे
हुज़ूर ! कैसे मैं गुज़रूँ पुल से ?
बचा लो आ कर, शफ़ी-ए-महशर !
कि पुल से अब मैं फिसल रहा हूँ
किसी के दर का फ़क़ीर हूँ मैं
मोहब्बतों का असीर हूँ मैं
मैं बे-सहारा नहीं हूँ, लोगो !
नबी के टुकड़ों पे पल रहा हूँ
मेरे जनाज़े पे रोने वालो !
फ़रेब में हो, ब-ग़ौर देखो
मरा नहीं हूँ, ग़म-ए-नबी में
लिबास-ए-हस्ती बदल रहा हूँ
बड़ी कठिन है, हसन ! ये रातें
सुनाते रहिए नबी की ना’तें
सुकून मिलता है दर्द-ए-दिल को
मैं ना’त सुन के बहल रहा हूँ
अबुल हसन नूरी
हज़रत सय्यद कैफ़ी अली क़ादरी रज़वी नूरी
आजमी अज़ीज़ी