मैं तो पंजतन का ग़ुलाम हूँ || Main To Panjtan Ka Ghulam Hoon
Main To Panjtan Ka Ghulam Hoon Lyrics In Hindi
मैं तो पंजतन का ग़ुलाम हूँ
मैं ग़ुलाम इब्न-ए-ग़ुलाम हूँ
मैं फ़क़ीर-ए-ख़ैरुल-अनाम हूँ
मैं तो पंजतन का ग़ुलाम हूँ
मुझे ‘इश्क़ है तो ख़ुदा से हैं
मुझे ‘इश्क़ है तो रसूल से हैं
ये करम है सारा बतूल का
मेरे मुँह से आए महक सदा
जो मैं नाम लूँ तेरा झूम के
मैं तो पंजतन का ग़ुलाम हूँ
मैं तो पंजतन का ग़ुलाम हूँ
मुझे ‘इश्क़ सर्व-ओ-समन से हैं
मुझे ‘इश्क़ सारे चमन से हैं
मुझे ‘इश्क़ उन के वतन से हैं
मुझे ‘इश्क़ उन की गली से हैं
मुझे ‘इश्क़ हैं तो ‘अली से हैं
मुझे ‘इश्क़ हैं तो हसन से हैं
मुझे ‘इश्क़ हैं तो हुसैन से हैं
मुझे ‘इश्क़ शाह-ए-ज़मन से हैं
मैं तो पंजतन का ग़ुलाम हूँ
मैं तो पंजतन का ग़ुलाम हूँ
हुआ कैसे तन से वो सर जुदा
जहाँ ‘इश्क़ हैं वहीं करबला
मेरी बात उन ही की बात हैं
मेरे सामने वहीं ज़ात हैं
वहीं जिन को शेर-ए-ख़ुदा कहें
जिन्हें बाब-ए-सल्ले-’अला कहें
वहीं जिन को ज़ात-ए-’अली कहें
वहीं पुख़्ता हैं, मैं तो ख़ाम हूँ
मैं तो पंजतन का ग़ुलाम हूँ
मैं तो पंजतन का ग़ुलाम हूँ
मैं क़मर ! हूँ शा’इर-ए-बे-नवा
मेरी हैसियत ही भला है क्या
वो हैं बादशाहों के बादशाह
मैं हूँ उन के दर का बस इक गदा
मेरा पंजतन से है वासिता
मेरा निस्बतों का है सिलसिला
मैं फ़क़ीर-ए-ख़ैरूल-अनाम हूँ
मैं तो पंजतन का ग़ुलाम हूँ
मैं तो पंजतन का ग़ुलाम हूँ
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