वो जो चाहें चाँद को तोड़ दें, उन्हें इख़्तियार दिया गया || Wo Jo Chahe Chand Ko Tod Den, Unhen Ikhtiyaar Diya Gaya
Wo Jo Chahe Chand Ko Tod Den, Unhen Ikhtiyaar Diya Gaya Lyrics
वो जो चाहें चाँद को तोड़ दें, उन्हें इख़्तियार दिया गया
वो फिर उस के टुकड़ों को जोड़ दें, उन्हें इख़्तियार दिया गया
जो ‘अली की ‘असर क़ज़ा हुई, तो वो वक़्त पर ही अदा हुई
छुपे आफ़ताब को मोड़ दें, उन्हें इख़्तियार दिया गया
किसी उम्मती को सक़र के रुख़ लिए जा रहे हो मलाइका
वो पकड़ के ख़ुल्द को मोड़ दें, उन्हें इख़्तियार दिया गया
वो नबी की मुट्ठी का मौ’जिज़ा कि ‘वमा रमैत’ कहे ख़ुदा
वो निगाह कुफ़्र की फोड़ दें, उन्हें इख़्तियार दिया गया
लिखो, नाज़िश ! उन का ये मौ’जिज़ा कि किसी की आँख निकल गई
तो लू’आब-ए-पाक से जोड़ दें, उन्हें इख़्तियार दिया गया
Wo jo chahe chand ko tod den,
unhen ikhtiyaar diya gaya
Wo phir us ke tukdon ko jod den,
unhen ikhtiyaar diya gaya
Jo ‘Ali ki ‘Asr qaza hui,
to wo waqt par hi ada hui
Chhupe Aaftab ko mod den,
unhen ikhtiyaar diya gaya
Kisi Ummati ko Saqar ke rukh
liye ja rahe ho Malaika
Wo pakad ke Khuld ko mod den,
unhen ikhtiyaar diya gaya
Wo Nabi ki mutthi ka mo’jiza
ki “Wama Ramaita” kahe Khuda
Wo nigah Kufr ki phod den,
unhen ikhtiyaar diya gaya
Likho, Nazish ! Un ka ye mo’jiza
ki kisi ki aankh nikal gai
To Lu’aab-e-Pak se jod den,
unhen ikhtiyaar diya gaya
हनीफ़ नाज़िश
ओवैस रज़ा क़ादरी
ज़ोहेब अशरफ़ी
हाफ़िज़ ताहिर क़ादरी
हाफ़िज़ एहसान क़ादरी
फ़िरोज़ हश्मती पाली