मोहे सपना मा दर्शन दिखाए गयो रे मोरे ग़ौस-उल-वरा || Mohe Sapna Ma Darshan Dikhaye Gayo Re More Ghaus-Ul-Wara
Mohe Sapna Ma Darshan Dikhaye Gayo Re More Ghaus-Ul-Wara Lyrics In Hindi
मोहे सपना मा दर्शन दिखाए गयो रे
मोरे ग़ौस-उल-वरा
मोरा सोते में भाग जगाए गयो रे
मोरे ग़ौस-उल-वरा
चश्मा बग़दाद का जब लगा आँख पर
देखा तयबा नगर
जानिब-ए-मक्का जब भी उठी है नज़र
देखा तयबा नगर
मोरे मन मा मदीना बसाए गयो रे
मोरे ग़ौस-उल-वरा
ग़म का तूफ़ान था, मैं परेशान था
मुझ को बख़्शा सुकूँ
टूटी पतवार थी और मैं हैरान था
मुझ को बख़्शा सुकूँ
मोरी डूबती नय्या तिराए गयो रे
मोरे ग़ौस-उल-वरा
ग़म की ज़ुल्मत छटी, रात काली कटी
और उजाला हुआ
रास्ते से मुसीबत की ज़ुल्मत हटी
और उजाला हुआ
मोरी आशा का दीप जलाए गयो रे
मोरे ग़ौस-उल-वरा
लब पे या ग़ौस या ग़ौस या ग़ौस हैं
हर नफ़स हर क़दम
ये ‘अक़ीदत की आवाज़ बे-लौस हैं
हर नफ़स हर क़दम
अहल-ए-सुन्नत का ना’रा सिखाए गयो रे
मोरे ग़ौस-उल-वरा
चाँदनी मुझ को, ए’जाज़ ! फीकी लगे
ऐसे अच्छे हैं वो
और किरन मुझ को सूरज की धुँधली लगे
ऐसे अच्छे हैं वो
कैसा नूरी मुखड़वा दिखाए गयो रे
मोरे ग़ौस-उल-वरा
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