अपने दर पे जो बुलाओ तो बहुत अच्छा हो || Apne Dar Pe Jo Bulao To Bahut Acha Ho
Apne Dar Pe Jo Bulao To Bahut Acha Ho Lyrics In Hindi
अपने दर पे जो बुलाओ तो बहुत अच्छा हो
मेरी बिगड़ी जो बनाओ तो बहुत अच्छा हो
क़ैद-ए-शैताँ से छुड़ाओ तो बहुत अच्छा हो
मुझ को अपना जो बनाओ तो बहुत अच्छा हो
गर्दिश-ए-दौर ने पामाल किया मुझ को, हुज़ूर !
अपने क़दमों में सुलाओ तो बहुत अच्छा हो
यूँ तो कहलाता हूँ बंदा मैं तुम्हारा लेकिन
अपना कह के जो बुलाओ तो बहुत अच्छा हो
ग़म-ए-पैहम से ये बस्ती मेरी वीरान हुई
दिल में अब ख़ुद को बसाओ तो बहुत अच्छा हो
कैफ़ इस बादा-ए-गुलनार से मिलता ही नहीं
अपनी आँखों से पिलाओ तो बहुत अच्छा हो
तुम तो मुर्दों को जिला देते हो, मेरे आक़ा !
मेरे दिल को भी जिलाओ तो बहुत अच्छा हो
जिस ने शर्मिंदा किया मेहर-ओ-मह-ओ-अंजुम को
इक झलक फिर वो दिखाओ तो बहुत अच्छा हो
रो चुका यूँ तो मैं औरो के लिए ख़ूब मगर
अपनी उल्फ़त में रुलाओ तो बहुत अच्छा हो
यूँ न अख़्तर को फिराओ, मेरे मौला ! दर दर
अपनी चौखट पे बिठाओ तो बहुत अच्छा हो
मुफ़्ती अख़्तर रज़ा ख़ान
साबिर रज़ा अज़हरी
अल्लामा हाफ़िज़ बिलाल क़ादरी
ओवैस रज़ा क़ादरी