तू सब को हज पे बुला रहा है | मुझे भी हज पे बुला ले मौला || Tu Sab Ko Hajj Pe Bula Raha Hai | Mujhe Bhi Hajj Pe Bula Le Maula
Tu Sab Ko Hajj Pe Bula Raha Hai | Mujhe Bhi Hajj Pe Bula Le Maula Lyrics In Hindi
तू सब को हज पे बुला रहा हैं
मुझे भी हज पे बुला ले, मौला !
तुझे मुहम्मद का वासिता हैं
मुझे भी हज पे बुला ले, मौला !
ज़बाँ पे लब्बैक की सदा हो
करूँ हरम का तवाफ़ मैं भी
यही तमन्ना हैं मेरे दिल की
ये इज़्न मुझ को भी दे, ख़ुदाया !
हो सामने तेरा प्यारा का’बा
पियूँ मैं ज़मज़म का जाम, मौला !
शरफ़ ‘अता कर मुझे भी, मौला !
है वासिता तुझ को मुस्तफ़ा का
ग़िलाफ़-ए-का’बा से मैं लिपट कर
दु’आएँ माँगूँ मैं ख़ूब रोऊँ
मु’आफ़ी माँगूँ मैं तुझ से, मौला !
तू बख़्श देना मुझे, ख़ुदाया !
मीना-ओ-मुज़्दलिफ़ा और ‘अरफ़ात –
के भी जल्वों को देखूँ, मौला !
करम ये फ़रमा दे तुझ को, मौला !
है वासिता बिन्त-ए-मुस्तफ़ा का
मैं चूमूँ प्यारा वो संग-ए-अस्वद
मुझे भी हासिल हो ये स’आदत
ऐ ख़ालिक़-ए-कुल ऐ मालिक-ए-कुल !
ये पूरी कर दे मेरी तमन्ना
हरम से हो कर मदीने जाऊँ
जहाँ पे सरदार-ए-दो-जहाँ हैं
पकड़ के उन की सुनहरी जाली
तलब करूँ सदक़ा पंजतन का
हैं आरज़ू उन के दर पे जाऊँ
मैं हाल दिल का उन्हें बताऊँ
जब उन की चौखट पे सर को रक्खूँ
हो ख़ातिमा मेरी ज़िंदगी का
शरफ़ दे शौक़-ए-फ़रीदी को भी
दर-ए-शह-ए-दीं पे हाज़िरी का
है वासिता तुझ को, मेरे मौला !
नबी-ए-अकरम के लाडलों का
हाफ़िज़ शौक़ फ़रीदी
असद रज़ा अत्तारी
अल्लामा हाफ़िज़ बिलाल क़ादरी