Neend Se Jagne Ki Dua | नींद से जागने की दुआ
सुबह नींद से जागना अल्लाह त’आला की बहुत बड़ी ने’मत है। जब हम रात को सोते हैं तो हमें यह नहीं मालूम होता कि अगली सुबह हमारी आंख खुलेगी या नहीं। इसलिए एक मुसलमान को चाहिए कि वह जागते ही सबसे पहले अल्लाह का शुक्र अदा करे और वह दु’आ पढ़े जो हमारे प्यारे नबी मुहम्मद ﷺ ने हमें सिखाई है।
यह दु’आ हमें अल्लाह की ने’मतों को याद दिलाती है और दिन की शुरुआत अल्लाह के ज़िक्र से करने की तालीम देती है।
اَلْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَحْيَانَا بَعْدَ مَا أَمَاتَنَا وَإِلَيْهِ النُّشُورُ
अल्हम्दु लिल्लाहिल-लज़ी अहयाना बअदमा अमातना व इलैहिन-नुशूर।
Alhamdu Lillahil-Lazi Ahyana Ba’da Ma Amatana Wa Ilaihin-Nushoor
” तमाम तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं, जिसने हमें मौत जैसी नींद के बाद फिर से ज़िंदा किया और उसी की तरफ़ हमें लौटकर जाना है। ”
“All praise belongs to Allah, Who has restored us back to life after causing us to die, and to Him shall we return.”
यह दुआ कब पढ़ी जाती है ?
यह दु’आ नींद से जागने के बाद पढ़ी जाती है। जैसे ही आपकी आंख खुले, सबसे पहले अल्लाह त’आला को याद करें और यह दु’आ पढ़ें।
इस दुआ का मतलब क्या है ?
इस दु’आ में हम अल्लाह त’आला का शुक्र अदा करते हैं कि उसने हमें एक और दिन की ज़िंदगी अता फरमाई।
नींद को मौत की तरह बताया गया है क्योंकि सोते समय इंसान अपने आसपास की चीज़ों से बेख़बर हो जाता है। जब अल्लाह त’आला हमें दोबारा जगाता है तो यह उसकी रहमत और उसका करम होता है।
यह दु’आ हमें यह भी याद दिलाती है कि एक दिन हमें दुनिया छोड़कर अल्लाह त’आला के सामने हाज़िर होना है।

आज के दौर में इस दुआ की अहमियत
आज बहुत से लोग सुबह उठते ही मोबाइल फोन देखने लगते हैं। सोशल मीडिया, मैसेज और दूसरी चीज़ें उनकी पहली तवज्जो बन जाती हैं।
लेकिन एक मुसलमान के लिए सबसे पहले अल्लाह त’आला को याद करना बेहतर है। यह छोटी सी दु’आ हमें अल्लाह त’आला का शुक्र अदा करना सिखाती है और दिन की अच्छी शुरुआत करने में मदद करती है।
आज के दौर में बच्चों को भी ये दुआ सीखनी चाहिए, क्योंकि जब बच्चे यह दुआ सीखते हैं तो उनमें अल्लाह त’आला का शुक्र अदा करने की आदत पैदा होती है।
माता-पिता रोज़ सुबह बच्चों के साथ मिलकर ये दुआ पढ़े ताकि आपके बच्चे नेक बन सके।
नींद से जागने की दुआ पढ़ने के फ़ज़ाइल
- अल्लाह का शुक्र अदा होता है।
- सुन्नत पर अमल करने का सवाब मिलता है।
- दिल में आखिरत की याद ताज़ा होती है।
- दिन की शुरुआत अल्लाह के ज़िक्र से होती है।
- इंसान में शुक्रगुज़ारी की आदत पैदा होती है।
नींद से जागने की दुआ एक छोटी लेकिन बहुत खूबसूरत मस्नून दुआ है। यह हमें अल्लाह का शुक्र अदा करना, उसकी ने’मतों को पहचानना और आखिरत को याद रखना सिखाती है। इसलिए जब भी सुबह आपकी आंख खुले, सबसे पहले अल्लाह को याद करें और इस सुन्नत दुआ को पढ़ने की आदत बनाएं।
अल्लाह तआला हमें हर सुन्नत पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन। 🤲🕌