अल्लाह त’आला के 99 नाम और उनके मतलब (99 Names of Allah with Meanings)
अल्लाह त’आला इस पूरी कायनात का ख़ालिक़, मालिक और पालनहार है। उसने इंसानों की रहनुमाई के लिए अंबिया-ए-किराम अलैहिमुस्सलाम को भेजा और अपनी किताबों के ज़रिए सही रास्ता दिखाया।
एक मुसलमान के लिए अपने रब को पहचानना, उससे मुहब्बत करना और उसकी इबादत करना सबसे बड़ी ने’मत है।
अल्लाह त’आला की पहचान का एक अहम ज़रिया उसके मुबारक नाम हैं, जिन्हें अस्मा-उल-हुस्ना कहा जाता है। “अस्मा-उल-हुस्ना” का मतलब है अल्लाह त’आला के सबसे अच्छे और ख़ूबसूरत नाम।
क़ुर’आन करीम में अल्लाह त’आला इरशाद फ़रमाता है :
“और अल्लाह ही के लिए अच्छे नाम हैं, तो उसे उन्हीं नामों से पुकारो।”
अल्लाह त’आला का हर नाम उसकी किसी न किसी सिफ़त को बयान करता है। कोई नाम उसकी रहमत को बयान करता है, कोई उसकी रहमदिली को, कोई उसकी कुदरत को और कोई उसकी बख़्शिश को।
जब एक मुसलमान अल्लाह त’आला के नामों को सीखता है, उनके मतलब समझता है और अपनी दु’आओं में उन्हें पढ़ता है, तो उसके दिल में अपने रब की मुहब्बत और भी बढ़ जाती है।
अस्मा-उल-हुस्ना क्या हैं?
अस्मा-उल-हुस्ना अरबी ज़बान का लफ़्ज़ है।
- अस्मा का मतलब है “नाम”
- हुस्ना का मतलब है “सबसे अच्छे” या “बेहद ख़ूबसूरत”
यानी अस्मा-उल-हुस्ना से मुराद अल्लाह त’आला के वे मुबारक नाम हैं जो उसकी अज़मत, रहमत, कुदरत और कमाल को बयान करते हैं।
अल्लाह त’आला का हर नाम अपने अंदर गहरी हिकमत और बड़ी नसीहत रखता है। जब हम “अर-रहमान” पढ़ते हैं तो हमें उसकी रहमत याद आती है, जब “अर-रज़्ज़ाक” पढ़ते हैं तो हमें याद आता है कि रोज़ी देने वाला सिर्फ़ अल्लाह है, और जब “अल-ग़फ़ूर” पढ़ते हैं तो हमें उसकी बख्शिश की उम्मीद मिलती है।
अल्लाह तआला के 99 नाम याद करने की फ़ज़ीलत
हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ ने इरशाद फ़रमाया कि :
अल्लाह त’आला के निन्यानवे (99) नाम हैं। जो उन्हें याद रखे, समझे और उनके मुताबिक़ अमल करे, वह जन्नत में दाख़िल होगा।
इस हदीस से मालूम होता है कि सिर्फ़ नाम ज़बानी याद कर लेना ही मक़सद नहीं, बल्कि उनके मतलब समझना और अपनी ज़िंदगी में उनका असर पैदा करना भी ज़रूरी है।
मिसाल के तौर पर :
- जब हम जानते हैं कि अल्लाह अर-रहीम है, तो हम उसकी रहमत से मायूस नहीं होते।
- जब हम जानते हैं कि अल्लाह अल-अलीम है, तो हमें यक़ीन होता है कि वह हमारे हर हाल को जानता है।
- जब हम जानते हैं कि अल्लाह अस-समीअ है, तो हम दु’आ करते वक़्त पूरा भरोसा रखते हैं कि वह हमारी आवाज़ सुन रहा है।
हमें अल्लाह त’आला के नाम क्यों सीखने चाहिए ?
अल्लाह त’आला के नाम सीखने के बहुत से फ़ायदे हैं :
- अल्लाह की पहचान बढ़ती है।
- ईमान मज़बूत होता है।
- दु’आ में ख़ुशू पैदा होता है।
- बच्चों को दीन की बुनियादी मालूमात मिलती है।
- अल्लाह से मुहब्बत और डर दोनों बढ़ते हैं।
- इंसान हर हाल में अपने रब पर भरोसा करना सीखता है।
अल्लाह त’आला के 99 नाम और उनके मतलब
अब हम अल्लाह त’आला के मुबारक नामों और उनके आसान मतलबों को तफ़सील से जानेंगे।
| नं. | नाम | नाम | आसान मतलब |
|---|---|---|---|
| 1 | ٱلرَّحْمَٰنُ | अर-रहमान | बहुत मेहरबान |
| 2 | ٱلرَّحِيمُ | अर-रहीम | रहम फ़रमाने वाला |
| 3 | ٱلْمَلِكُ | अल-मलिक | सबका बादशाह |
| 4 | ٱلْقُدُّوسُ | अल-कुद्दूस | हर ऐब से पाक |
| 5 | ٱلسَّلَامُ | अस-सलाम | सलामती देने वाला |
| 6 | ٱلْمُؤْمِنُ | अल-मु’मिन | अमन देने वाला |
| 7 | ٱلْمُهَيْمِنُ | अल-मुहैमिन | निगहबानी फ़रमाने वाला |
| 8 | ٱلْعَزِيزُ | अल-अज़ीज़ | सबसे ग़ालिब |
| 9 | ٱلْجَبَّارُ | अल-जब्बार | कुदरत वाला |
| 10 | ٱلْمُتَكَبِّرُ | अल-मुतकब्बिर | बड़ाई वाला |
| 11 | ٱلْخَٰلِقُ | अल-ख़ालिक़ | पैदा करने वाला |
| 12 | ٱلْبَارِئُ | अल-बारी | जान डालने वाला |
| 13 | ٱلْمُصَوِّرُ | अल-मुसव्विर | सूरत बनाने वाला |
| 14 | ٱلْغَفَّارُ | अल-ग़फ़्फ़ार | बहुत बख़्शने वाला |
| 15 | ٱلْقَهَّارُ | अल-क़ह्हार | सब पर ग़ालिब |
| 16 | ٱلْوَهَّابُ | अल-वह्हाब | बहुत देने वाला |
| 17 | ٱلرَّزَّاقُ | अर-रज़्ज़ाक | रोज़ी देने वाला |
| 18 | ٱلْفَتَّاحُ | अल-फ़त्ताह | मुश्किलें खोलने वाला |
| 19 | ٱلْعَلِيمُ | अल-अलीम | सब कुछ जानने वाला |
| 20 | ٱلْقَابِضُ | अल-क़ाबिद | रोकने वाला |
| 21 | ٱلْبَاسِطُ | अल-बासित | फैलाने वाला |
| 22 | ٱلْخَافِضُ | अल-ख़ाफ़िद | नीचे करने वाला |
| 23 | ٱلرَّافِعُ | अर-राफ़िअ | बुलंद करने वाला |
| 24 | ٱلْمُعِزُّ | अल-मुइज़्ज़ | इज़्ज़त देने वाला |
| 25 | ٱلْمُذِلُّ | अल-मुज़िल्ल | ज़िल्लत देने वाला |
| 26 | ٱلسَّمِيعُ | अस-समीअ | सब कुछ सुनने वाला |
| 27 | ٱلْبَصِيرُ | अल-बसीर | सब कुछ देखने वाला |
| 28 | ٱلْحَكَمُ | अल-हकम | फ़ैसला फ़रमाने वाला |
| 29 | ٱلْعَدْلُ | अल-अद्ल | इंसाफ़ फ़रमाने वाला |
| 30 | ٱللَّطِيفُ | अल-लतीफ़ | बड़ा मेहरबान |
| 31 | ٱلْخَبِيرُ | अल-ख़बीर | हर बात से ख़बर रखने वाला |
| 32 | ٱلْحَلِيمُ | अल-हलीम | बहुत बर्दाश्त फ़रमाने वाला |
| 33 | ٱلْعَظِيمُ | अल-अज़ीम | बहुत अज़मत वाला |
| 34 | ٱلْغَفُورُ | अल-ग़फ़ूर | बड़ा बख्शने वाला |
| 35 | ٱلشَّكُورُ | अश-शकूर | क़द्र फ़रमाने वाला |
| 36 | ٱلْعَلِيُّ | अल-अली | सबसे बुलंद |
| 37 | ٱلْكَبِيرُ | अल-कबीर | सबसे बड़ा |
| 38 | ٱلْحَفِيظُ | अल-हफ़ीज़ | हिफ़ाज़त फ़रमाने वाला |
| 39 | ٱلْمُقِيتُ | अल-मुक़ीत | रोज़ी पहुँचाने वाला |
| 40 | ٱلْحَسِيبُ | अल-हसीब | हिसाब लेने वाला |
| 41 | ٱلْجَلِيلُ | अल-जलील | बड़ी शान वाला |
| 42 | ٱلْكَرِيمُ | अल-करीम | बहुत करम फ़रमाने वाला |
| 43 | ٱلرَّقِيبُ | अर-रक़ीब | निगरानी फ़रमाने वाला |
| 44 | ٱلْمُجِيبُ | अल-मुजीब | दुआ क़ुबूल फ़रमाने वाला |
| 45 | ٱلْوَاسِعُ | अल-वासिअ | बहुत वुसअत वाला |
| 46 | ٱلْحَكِيمُ | अल-हकीम | बड़ी हिकमत वाला |
| 47 | ٱلْوَدُودُ | अल-वदूद | मुहब्बत फ़रमाने वाला |
| 48 | ٱلْمَجِيدُ | अल-मजीद | बड़ी बुज़ुर्गी वाला |
| 49 | ٱلْبَاعِثُ | अल-बाइस | उठाने वाला |
| 50 | ٱلشَّهِيدُ | अश-शहीद | हर चीज़ का गवाह |
| 51 | ٱلْحَقُّ | अल-हक़ | सच्चा |
| 52 | ٱلْوَكِيلُ | अल-वकील | काम बनाने वाला |
| 53 | ٱلْقَوِيُّ | अल-क़वी | बहुत ताक़तवर |
| 54 | ٱلْمَتِينُ | अल-मतीन | बहुत मज़बूत |
| 55 | ٱلْوَلِيُّ | अल-वली | मददगार |
| 56 | ٱلْحَمِيدُ | अल-हमीद | हर तारीफ़ का हक़दार |
| 57 | ٱلْمُحْصِي | अल-मुह्सी | सबका हिसाब रखने वाला |
| 58 | ٱلْمُبْدِئُ | अल-मुब्दी | पहली बार पैदा करने वाला |
| 59 | ٱلْمُعِيدُ | अल-मुईद | दोबारा पैदा करने वाला |
| 60 | ٱلْمُحْيِي | अल-मुहयी | ज़िंदगी देने वाला |
| 61 | ٱلْمُمِيتُ | अल-मुमीत | मौत देने वाला |
| 62 | ٱلْحَيُّ | अल-हय्य | हमेशा ज़िंदा |
| 63 | ٱلْقَيُّومُ | अल-कय्यूम | सबको संभालने वाला |
| 64 | ٱلْوَاجِدُ | अल-वाजिद | हर चीज़ पाने वाला |
| 65 | ٱلْمَاجِدُ | अल-माजिद | बड़ी शान वाला |
| 66 | ٱلْوَاحِدُ | अल-वाहिद | एक |
| 67 | ٱلْأَحَدُ | अल-अहद | यकता |
| 68 | ٱلصَّمَدُ | अस-समद | सबसे बेनियाज़ |
| 69 | ٱلْقَادِرُ | अल-क़ादिर | कुदरत वाला |
| 70 | ٱلْمُقْتَدِرُ | अल-मुक़्तदिर | बड़ी कुदरत वाला |
| 71 | ٱلْمُقَدِّمُ | अल-मुकद्दिम | आगे करने वाला |
| 72 | ٱلْمُؤَخِّرُ | अल-मुअख्खिर | पीछे करने वाला |
| 73 | ٱلْأَوَّلُ | अल-अव्वल | सबसे पहला |
| 74 | ٱلْآخِرُ | अल-आख़िर | सबसे आख़िरी |
| 75 | ٱلظَّاهِرُ | अज़-ज़ाहिर | ज़ाहिर |
| 76 | ٱلْبَاطِنُ | अल-बातिन | छुपी बातों को जानने वाला |
| 77 | ٱلْوَالِي | अल-वाली | मालिक और निगहबान |
| 78 | ٱلْمُتَعَالِي | अल-मुतआली | सबसे बुलंद |
| 79 | ٱلْبَرُّ | अल-बर्र | बड़ा एहसान फ़रमाने वाला |
| 80 | ٱلتَّوَابُ | अत-तव्वाब | तौबा क़ुबूल करने वाला |
| 81 | ٱلْمُنْتَقِمُ | अल-मुन्तक़िम | बदला लेने वाला |
| 82 | ٱلْعَفُوُّ | अल-अफ़ुव्व | माफ़ फ़रमाने वाला |
| 83 | ٱلرَّءُوفُ | अर-रऊफ़ | बहुत शफ़क़त फ़रमाने वाला |
| 84 | مَالِكُ ٱلْمُلْكِ | मालिकुल मुल्क | सारी बादशाहत का मालिक |
| 85 | ذُو ٱلْجَلَالِ وَٱلْإِكْرَامِ | ज़ुल जलालि वल इकराम | जलाल और इकराम वाला |
| 86 | ٱلْمُقْسِطُ | अल-मुक़्सित | इंसाफ़ करने वाला |
| 87 | ٱلْجَامِعُ | अल-जामिअ | जमा करने वाला |
| 88 | ٱلْغَنِيُّ | अल-ग़नी | बेनियाज़ |
| 89 | ٱلْمُغْنِيُ | अल-मुग़नी | बेनियाज़ करने वाला |
| 90 | ٱلْمَانِعُ | अल-मानि’ | रोकने वाला |
| 91 | ٱلضَّارُّ | अद-दार | नुक़सान पहुँचाने वाला |
| 92 | ٱلنَّافِعُ | अन-नाफ़िअ | फ़ायदा पहुँचाने वाला |
| 93 | ٱلنُّورُ | अन-नूर | नूर देने वाला |
| 94 | ٱلْهَادِي | अल-हादी | हिदायत देने वाला |
| 95 | ٱلْبَدِيعُ | अल-बदीअ | बेमिसाल पैदा करने वाला |
| 96 | ٱلْبَاقِي | अल-बाक़ी | हमेशा रहने वाला |
| 97 | ٱلْوَارِثُ | अल-वारिस | सबका वारिस |
| 98 | ٱلرَّشِيدُ | अर-रशीद | सही राह दिखाने वाला |
| 99 | ٱلصَّبُورُ | अस-सबूर | बड़ा सब्र फ़रमाने वाला |
अल्लाह त’आला के कुछ अहम नाम और उनसे मिलने वाली सीख
अल्लाह त’आला का हर नाम अपने अंदर रहमत, हिकमत और नसीहत का पैग़ाम रखता है। जब हम इन नामों के मतलब समझते हैं तो हमें अपने रब की पहचान और भी बेहतर तरीक़े से होती है।
आइए कुछ अहम नामों और उनसे मिलने वाली सीख को जानते हैं :-
अर-रहमान (बहुत मेहरबान) :-
अल्लाह त’आला की रहमत पूरी मख़लूक़ पर छाई हुई है। इंसान, जानवर, परिंदे और पूरी कायनात उसकी रहमत से फ़ायदा उठा रही है। यह नाम हमें भी दूसरों पर रहम करने की तालीम देता है।
अर-रहीम (रहम फ़रमाने वाला) :-
अल्लाह त’आला अपने बंदों पर बेहद रहम फ़रमाने वाला है। जब बंदा सच्चे दिल से तौबा करता है तो अल्लाह उसकी मग़फ़िरत फ़रमा देता है।
अर-रज़्ज़ाक (रोज़ी देने वाला) :-
दुनिया में हर ज़िंदा चीज़ की रोज़ी अल्लाह त’आला के ज़िम्मे है। इसलिए मुसलमान को रोज़ी के मामले में सिर्फ़ अपने रब पर भरोसा रखना चाहिए।
अल-ग़फ़ूर (बहुत बख्शने वाला) :-
इंसान से ग़लतियाँ होती हैं, लेकिन अल्लाह त’आला अपने बंदों को माफ़ फ़रमाने वाला है। हमें कभी उसकी रहमत से मायूस नहीं होना चाहिए।
अल-वदूद (मुहब्बत फ़रमाने वाला) :-
अल्लाह त’आला अपने नेक बंदों से मुहब्बत फ़रमाता है। यह नाम हमें मुहब्बत, अख़लाक़ और भाईचारे की तालीम देता है।
अल्लाह त’आला के नामों से दुआ कैसे करें ?
अल्लाह त’आला ने अपने बंदों को यह तालीम दी है कि उसे उसके अच्छे नामों के साथ पुकारा जाए। जब कोई मुसलमान अपनी ज़रूरत और हालात के मुताबिक़ अल्लाह त’आला के मुबारक नामों के ज़रिए दु’आ करता है, तो उसके दिल में यक़ीन, उम्मीद और अपने रब से क़ुर्बत का एहसास और बढ़ जाता है।
मिसाल के तौर पर :
- रोज़ी में बरकत की दुआ करते वक़्त या रज़्ज़ाक पढ़ा जा सकता है।
- मग़फ़िरत और बख्शिश के लिए या ग़फ़ूर और या अफ़ुव्व पढ़ा जा सकता है।
- रहमत और करम की उम्मीद में या रहमान और या रहीम कहा जा सकता है।
- इल्म और समझ के लिए या अलीम पढ़ा जा सकता है।
- हिदायत और सही रास्ते की दुआ के लिए या हादी पढ़ा जा सकता है।
याद रहे कि दु’आ क़ुबूल करने वाली ज़ात सिर्फ़ अल्लाह त’आला की है और उसके मुबारक नाम दु’आ में अदब और उम्मीद को बढ़ाते हैं।
बच्चों को अल्लाह त’आला के 99 नाम कैसे याद कराएँ ?
आज के दौर में बच्चों को दीन की बुनियादी मालूमात सिखाना पहले से ज़्यादा ज़रूरी हो गया है। अस्मा-उल-हुस्ना बच्चों के दिलों में अल्लाह त’आला की पहचान पैदा करने का बेहतरीन ज़रिया हैं।
1. रोज़ कुछ नाम याद कराएँ
एक साथ 99 नाम याद कराने के बजाय रोज़ 2 या 3 नाम सिखाएँ।
2. नाम के साथ मतलब भी बताएं
सिर्फ़ नाम याद कराने के बजाय उसका आसान मतलब भी समझाएँ।
3. रोज़मर्रा की मिसालें दें
जैसे “अर-रज़्ज़ाक” समझाते वक़्त बताएं कि खाने-पीने की हर ने’मत अल्लाह त’आला की तरफ़ से है।
4. घर में दोहराने की आदत बनाएं
नमाज़ के बाद या सोने से पहले कुछ नाम पढ़ने की आदत डालें।
5. प्यार और मुहब्बत के साथ सिखाएँ
दीन की तालीम हमेशा नरमी और मुहब्बत के साथ देनी चाहिए।
अल्लाह त’आला के 99 नाम सीखने के फ़ायदे
अस्मा-उल-हुस्ना को सीखना और समझना एक मुसलमान के ईमान को मज़बूत बनाता है।
इसके कुछ अहम फ़ायदे यह हैं :
- अल्लाह त’आला की पहचान बढ़ती है।
- दिल में अल्लाह की मुहब्बत पैदा होती है।
- दु’आ में ख़ुशू और यक़ीन बढ़ता है।
- गुनाहों से बचने का जज़्बा पैदा होता है।
- अल्लाह त’आला पर भरोसा मज़बूत होता है।
- बच्चों को दीन की बुनियादी तालीम मिलती है।
- इंसान हर हाल में अपने रब की तरफ़ रुजू करना सीखता है।
अस्मा-उल-हुस्ना क्या हैं ?
अस्मा-उल-हुस्ना से मुराद अल्लाह त’आला के 99 मुबारक नाम हैं, जो उसकी अज़मत, रहमत, कुदरत और दूसरी सिफ़ात को बयान करते हैं।
क्या अल्लाह तआला के सिर्फ़ 99 नाम ही हैं ?
अल्लाह त’आला के नाम 99 तक महदूद नहीं हैं। हदीस शरीफ़ में 99 नामों की ख़ास फ़ज़ीलत बयान की गई है, लेकिन अल्लाह त’आला के और भी नाम और सिफ़ात हैं जिनका इल्म उसी को है।
99 नाम याद करने की क्या फ़ज़ीलत है ?
हदीस शरीफ़ में 99 नामों को याद रखने, समझने और उनकी हिफ़ाज़त करने वालों के लिए जन्नत की बशारत बयान की गई है।
क्या बच्चों को अस्मा-उल-हुस्ना सिखाना चाहिए ?
जी हाँ, बच्चों को छोटी उम्र से ही अल्लाह त’आला के नाम और उनके मतलब सिखाना बहुत फ़ायदेमंद है।
क्या दुआ में अल्लाह तआला के नाम पढ़ सकते हैं ?
जी हाँ, अपनी ज़रूरत और मक़सद के मुताबिक़ अल्लाह त’आला के मुबारक नामों के साथ दु’आ करना बेहतर अमल है।
अल्लाह त’आला के 99 नाम, जिन्हें अस्मा-उल-हुस्ना कहा जाता है, हर मुसलमान के लिए इल्म, मुहब्बत और हिदायत का ख़ज़ाना हैं। इन नामों के ज़रिए हमें अपने रब की रहमत, कुदरत, हिकमत और अज़मत को समझने का मौक़ा मिलता है।
जब हम इन नामों को सिर्फ़ ज़बानी याद करने के बजाय उनके मतलब समझते हैं और अपनी ज़िंदगी में उन्हें अपनाने की कोशिश करते हैं, तो हमारा ईमान और अल्लाह त’आला पर भरोसा और मज़बूत हो जाता है।
आइए हम भी कोशिश करें कि अस्मा-उल-हुस्ना को सीखें, अपने बच्चों को सिखाएँ और अपनी दु’आओं में इन मुबारक नामों को शामिल करें।
अल्लाह त’आला हमें अपने मुबारक नामों की सही पहचान, उन पर अमल करने की तौफ़ीक़ और अपनी रहमत से मालामाल फ़रमाए।
आमीन या रब्बुल आलमीन। 🌹